केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों राशन कार्ड धारकों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सोशल मीडिया और कई खबरों में दावा किया जा रहा है कि मोदी कैबिनेट ने गरीबों के लिए नई राशन योजना शुरू की है, जिसके तहत मुफ्त अनाज और डिजिटल सुविधाओं का बड़ा विस्तार होगा। पड़ताल में सामने आया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “सार्थक पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (SARTHAK-PDS)” योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS को आधुनिक और मजबूत बनाना है।
सरकारी जानकारी के अनुसार इस योजना पर अगले पांच वर्षों में करीब 25,530 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना का मकसद राशन वितरण प्रणाली में तकनीकी सुधार, खाद्यान्न परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना, राशन डीलरों को सहायता देना और लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से अनाज पहुंचाना है।
हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि सरकार सभी गरीब परिवारों के खातों में नकद राशि भेजने जा रही है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिला। यह योजना मुख्य रूप से PDS नेटवर्क के आधुनिकीकरण और राशन वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस योजना से देश के लगभग 81 करोड़ लाभार्थियों को फायदा मिलने की बात कही गई है। यह वही आबादी है जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत मुफ्त या रियायती राशन प्राप्त करती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत डिजिटल टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि फर्जी राशन कार्ड और वितरण में गड़बड़ी को रोका जा सके। वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) व्यवस्था को और मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा, जिससे प्रवासी मजदूर और दूसरे राज्यों में रहने वाले लाभार्थी कहीं से भी राशन प्राप्त कर सकें।
कुछ वायरल दावों में यह भी कहा जा रहा है कि यह पूरी तरह नई योजना है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि SARTHAK-PDS मौजूदा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने की विस्तारित पहल है। इसका सीधा संबंध राशन वितरण व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने से है।
जानकारों के अनुसार सरकार पिछले कुछ वर्षों से खाद्य सुरक्षा योजनाओं को टेक्नोलॉजी आधारित बनाने पर जोर दे रही है। 2023 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले पांच वर्षों तक बढ़ाने का फैसला लिया था, जिसके तहत 81 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना सही तरीके से लागू होती है तो राशन वितरण में भ्रष्टाचार कम हो सकता है और गरीबों तक अनाज पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। हालांकि कई राज्यों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, आधार सत्यापन और वितरण नेटवर्क जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
फिलहाल सरकार की ओर से इसे गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। आने वाले समय में इस योजना के क्रियान्वयन और राज्यों के सहयोग पर इसकी सफलता काफी हद तक निर्भर करेगी।
