मणिपुर एक बार फिर गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। राज्य में जारी बंधक संकट और नागा-कुकी समुदायों के बीच बढ़ते तनाव ने अब आम लोगों की जिंदगी को भी बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर जारी आर्थिक नाकेबंदी के कारण हजारों ट्रक फंस गए हैं, जिससे पेट्रोल, खाद्य सामग्री और जरूरी सामानों की सप्लाई बाधित हो गई है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई इलाकों में आवश्यक वस्तुओं की कमी महसूस होने लगी है।
जानकारी के मुताबिक यह पूरा विवाद 13 मई को हुई हिंसक घटना के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ नागरिकों के अपहरण और कई लोगों के लापता होने के बाद नागा और कुकी संगठनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) का दावा है कि उनके समुदाय के छह लोग कुकी समूहों के कब्जे में हैं, जबकि कुकी संगठनों का कहना है कि उनके 14 सदस्य लापता हैं और उन्हें नागा समूहों ने बंधक बना रखा है।
इसी विवाद के बाद दोनों समुदायों ने अलग-अलग इलाकों में बंद और आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी। सबसे ज्यादा असर नेशनल हाईवे-2 पर पड़ा है, जो मणिपुर की लाइफलाइन माना जाता है। यह हाईवे राज्य को नागालैंड और असम से जोड़ता है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2,000 से ज्यादा ट्रक अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं। इनमें आलू, प्याज, पेट्रोलियम पदार्थ, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी सामान ले जा रहे वाहन शामिल हैं।
ट्रक ड्राइवरों और यात्रियों की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। कई लोग पिछले पांच से नौ दिनों से हाईवे पर फंसे हुए हैं। खाने-पीने का सामान खत्म होने लगा है और पानी की भी किल्लत हो रही है। स्थानीय लोगों, असम राइफल्स और ड्राइवर यूनियनों द्वारा राहत सामग्री बांटी जा रही है, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
मणिपुर कंसोर्टियम ऑफ पोटैटो एंड ऑनियन फ्रेट्स एंड ट्रेडर्स (MACPOFT) ने दावा किया है कि राज्य में रोजाना सात से आठ ट्रक आलू और प्याज की जरूरत होती है, लेकिन नाकेबंदी के कारण सिर्फ एक या दो ट्रक ही इम्फाल पहुंच पा रहे हैं। इसके चलते बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ने लगी हैं। व्यापारियों ने सरकार पर जमाखोरी रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
इस बीच मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने लोगों से शांति बनाए रखने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बंद और नाकेबंदी का सबसे ज्यादा असर गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है। सरकार का दावा है कि सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं और बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने की कोशिश की जा रही है।
राज्य में बढ़ते तनाव के कारण कई इलाकों में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। चर्च संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी शांति बहाल करने के लिए मध्यस्थता शुरू की है। हालांकि अब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।
मणिपुर पहले से ही जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। ऐसे में यह नया बंधक संकट और आर्थिक नाकेबंदी राज्य के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आम लोग अब जल्द शांति बहाली और हाईवे खोलने की मांग कर रहे हैं ताकि जरूरी सामानों की आपूर्ति फिर से सामान्य हो सके।
