दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब सईदुलाजाब (Saidulajab) इलाके में स्थित एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में कम से कम एक युवक की मौत हो गई, जबकि आठ से अधिक लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और देर रात तक एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस तथा अन्य एजेंसियां राहत और बचाव कार्य में जुटी रहीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इमारत गिरने से पहले जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। कुछ स्थानीय लोगों ने इसे जनरेटर ब्लास्ट जैसा बताया। आवाज के कुछ सेकंड बाद पूरी इमारत धूल के गुबार के साथ जमीन पर आ गिरी। हादसे के समय आसपास मौजूद लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई घायलों को बाहर निकालने में मदद की।
जानकारी के मुताबिक यह इमारत कोचिंग सेंटर, कैफे, ऑफिस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कार्य भी चल रहा था। इमारत गिरने के बाद उसका मलबा पास की टिन शेड कैंटीन और अन्य हिस्सों पर जा गिरा, जहां छात्र मौजूद थे। इसी कारण कई लोग मलबे में दब गए।
राहत एजेंसियों ने रातभर अभियान चलाकर कई लोगों को बाहर निकाला। घायलों को तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया। शुरुआती रिपोर्टों में एक मौत और आठ लोगों के रेस्क्यू की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद की कुछ मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या बढ़कर चार तक बताए जाने का दावा भी सामने आया। इस वजह से प्रशासन ने अंतिम आधिकारिक आंकड़ों के लिए जांच पूरी होने तक इंतजार करने की बात कही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में कई इमारतों का निर्माण सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर किया गया है। हादसे के बाद एक बार फिर दिल्ली में अवैध निर्माण, भवन सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया हो, तो ऐसी दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। फिलहाल हादसे के वास्तविक कारणों की जांच जारी है।
