कोलकाता : शारदीय नवरात्रि का नौवां दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। महानवमी के इस पावन अवसर पर भक्त माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि, ज्ञान तथा सफलता की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की आराधना से जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों को माता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं महानवमी पर पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और भोग से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
महानवमी 2026 कब है? जानें शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार पूजा की तिथि में अंतर हो सकता है।
- महानवमी: 19 अक्टूबर 2026, सोमवार
- नवमी तिथि प्रारंभ: 19 अक्टूबर, सुबह 10:51 बजे
- नवमी तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर, दोपहर 12:50 बजे
- अभिजीत मुहूर्त (19 अक्टूबर): सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
पूजा और कन्या पूजन का समय तय करने से पहले स्थानीय पंचांग अवश्य देख लें।
मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें?
महानवमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल की सफाई कर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद माता का ध्यान करके पूजा का संकल्प लें।
माता को रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प और चुनरी अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं और श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करें। इसके बाद मां सिद्धिदात्री की व्रत कथा पढ़ें और आरती करें। पूजा के अंत में प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।
मां सिद्धिदात्री को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महानवमी पर मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूड़ी, काले चने, खीर, नारियल और मौसमी फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सात्विक भोग तैयार कर सकते हैं।
मां सिद्धिदात्री का शक्तिशाली मंत्र
महानवमी की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।
इसके अलावा मां की स्तुति का पाठ भी किया जा सकता है:
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
महानवमी पर कन्या पूजन का महत्व
नवरात्रि की नवमी पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है। उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है और सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा दी जाती है। कई परिवार कन्या पूजन के साथ हवन भी करते हैं और इसके बाद व्रत का पारण करते हैं।
मां सिद्धिदात्री की पूजा का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री भक्तों को सिद्धि, बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव को भी मां सिद्धिदात्री की कृपा से सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। महानवमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और शक्ति की उपासना का प्रतीक है। इस दिन भक्त माता से परिवार की सुख-शांति, कल्याण और उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करते हैं।
