झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के आरोपों के बीच राजधानी रांची का जयपाल सिंह स्टेडियम आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी यहां अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठे हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों की क्या हैं प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। वे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई प्रदर्शनकारी CBI और ED जैसी एजेंसियों से जांच कराने की भी मांग उठा रहे हैं। साथ ही आयोगों में प्रशासनिक सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की जा रही है।
रांची का जयपाल सिंह स्टेडियम बना आंदोलन का केंद्र
पिछले कुछ दिनों से हजारों छात्र जयपाल सिंह स्टेडियम में डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में सामने आ रहे कथित विवादों के खिलाफ युवाओं की आवाज है। लगातार बढ़ती भीड़ के कारण इस आंदोलन की तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर से की जा रही है।
सरकार पर बढ़ रहा दबाव
छात्रों के आंदोलन ने राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है और भर्ती परीक्षाओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है। वहीं सरकार की ओर से जांच प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गई है, लेकिन प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट नहीं हैं और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका सत्याग्रह जारी रहेगा। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई से ही युवाओं का विश्वास बहाल किया जा सकता है।
