संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए होने वाले चुनाव से पहले जर्मनी ने अपनी दावेदारी को लेकर पूरा भरोसा जताया है। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल (Johann Wadephul) ने कहा है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जर्मनी को सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए सदस्य देशों का व्यापक समर्थन मिलेगा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में जल्द ही सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीटों के लिए मतदान होना है। जर्मनी 2027-28 कार्यकाल के लिए उम्मीदवार है। चुनाव से पहले वाडेफुल ने न्यूयॉर्क में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि दुनिया इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनमें यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व संकट, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
विदेश मंत्री ने कहा कि जर्मनी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और बहुपक्षीय कूटनीति का समर्थक रहा है। उनका दावा है कि सुरक्षा परिषद में जर्मनी की मौजूदगी वैश्विक शांति और स्थिरता को मजबूत करने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जर्मनी विकासशील देशों और वैश्विक दक्षिण (Global South) के मुद्दों को भी मजबूती से उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के बजट में प्रमुख योगदानकर्ताओं में भी शामिल है। यही कारण है कि उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक प्रभावशाली देश के रूप में देखा जाता है। हालांकि सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव में अंतिम फैसला संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्य देशों के मतदान से ही होगा।
जर्मनी इससे पहले भी कई बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। पिछली बार उसने 2019-20 कार्यकाल के दौरान परिषद में अपनी भूमिका निभाई थी। उस दौरान जर्मनी ने जलवायु सुरक्षा, संघर्ष रोकथाम और मानवीय सहायता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, जर्मनी इस बार भी वैश्विक सहयोग, शांति स्थापना और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान को अपनी प्राथमिकता बना रहा है। वाडेफुल का मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय माहौल में ऐसे देशों की जरूरत है जो संवाद और सहयोग को बढ़ावा दें, न कि टकराव को।
