नागपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में देश और दुनिया के राजनीतिक हालात पर अपनी बात रखी। उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और अल्बानिया में हुए घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल सत्ता परिवर्तन से किसी देश की समस्याएं हल नहीं होतीं। उन्होंने दावा किया कि भारत में भी इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन देश को कमजोर करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
बांग्लादेश और नेपाल का उदाहरण देकर क्या बोले भागवत?
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के कई देशों में राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल देखने को मिली है। उन्होंने फ्रांस और अल्बानिया में जारी घटनाक्रमों के साथ बांग्लादेश और नेपाल की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया।
भागवत के मुताबिक, कुछ ताकतें यह मानती हैं कि सरकार या सत्ता बदलने से हालात बदल जाएंगे, लेकिन उनके अनुसार ऐसा जरूरी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के कई हिस्सों में अपने हितों को साधने वाली ताकतें राजनीतिक बदलावों के जरिए प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत भी ऐसी कोशिशों का लक्ष्य है। हालांकि, ये उनके अपने राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से जुड़े आकलन हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अलग-अलग घटनाओं के प्रमाणों को देखना जरूरी है।
भारत को कमजोर करने की कोशिशों का आरोप
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत पिछले कुछ दशकों में विकास की दिशा में आगे बढ़ा है। उनके अनुसार, देश की नीतियों और नेतृत्व की वजह से भारत में ऐसे प्रयास सफल नहीं हो पाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत, हिंदू समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कमजोर करना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश के विकास के साथ कई समस्याएं बनी रह सकती हैं, लेकिन उनका समाधान सामाजिक एकता और निरंतर प्रयासों से होना चाहिए।
भागवत ने युवाओं की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी भारत के लिए बहुत कुछ करना चाहती है। उनके अनुसार, युवाओं की ऊर्जा और देश के प्रति जुड़ाव भारत को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
क्या केवल सरकार बदलने से समस्याएं हल होती हैं?
अपने संबोधन में भागवत ने सत्ता परिवर्तन को समस्याओं का स्थायी समाधान मानने पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि सरकार बदलने से अपने आप परिस्थितियां बेहतर नहीं हो जातीं। किसी देश की वास्तविक प्रगति के लिए उसकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान पर काम करना जरूरी है।
हालांकि, लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बदलना जनता का संवैधानिक अधिकार है। चुनाव और शांतिपूर्ण विरोध के माध्यम से नागरिक सरकार की नीतियों पर अपनी असहमति जाहिर कर सकते हैं। इसलिए सत्ता परिवर्तन और किसी देश को अस्थिर करने की कोशिशों के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है।
विजयादशमी पर सामाजिक एकता का संदेश
नागपुर में आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम में भागवत ने देश की एकता और सामाजिक सद्भाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता उसकी विशेषता है और समाज को आपसी मतभेदों के बावजूद एकजुट रहना चाहिए।
उनके संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास, युवाओं की भूमिका और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों जैसे मुद्दे शामिल रहे। इस कार्यक्रम में उन्होंने देश के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए सामाजिक एकता को महत्वपूर्ण बताया।
भागवत के बयान के बाद सत्ता परिवर्तन, विरोध प्रदर्शनों और भारत की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, उनके आरोपों और राजनीतिक घटनाक्रमों को समझने के लिए संबंधित मामलों के तथ्यों और विभिन्न पक्षों के विचारों को देखना जरूरी होगा।
