पश्चिम बंगाल की राजनीति में 15 साल बाद एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और नंदीग्राम के नायक सुवेंदु अधिकारी ने आज पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राजभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण के साथ ही बंगाल में 'ममता राज' का औपचारिक अंत और 'कमल दल' के शासन की शुरुआत हो गई है। अमित शाह की हुंकार- महिला सुरक्षा टॉप प्रायोरिटी
शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई सरकार के विजन को स्पष्ट किया। शाह ने घोषणा की कि बंगाल में सुवेंदु सरकार की पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता 'महिला सुरक्षा' होगी। गृह मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था को बहाल किया जाएगा और महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे नई कैबिनेट का 'टॉप प्रायोरिटी' एजेंडा बताया।
कैबिनेट का चेहरा: अनुभव और युवा शक्ति का संगम
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ कई वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। नई कैबिनेट के गठन में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है: अग्निमित्रा पॉल और दिलीप घोष: इन प्रमुख चेहरों को कैबिनेट में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ समुदाय के प्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में विशेष स्थान दिया गया है ताकि विकास का लाभ हर कोने तक पहुँचे।
भ्रष्टाचार पर वार
नई कैबिनेट की पहली प्राथमिकता राज्य में हुए पिछले घोटालों की जांच और प्रशासनिक शुचिता लाना होगा।
सादगी और संघर्ष का मुख्यमंत्री
55 वर्षीय सुवेंदु अधिकारी एक अविवाहित मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राजनीति को समर्पित किया है। उनके हलफनामे के अनुसार, वे लगभग 1 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं और उनकी छवि एक बेहद सादे और जमीनी नेता की रही है। जनता को उनसे उम्मीद है कि एक 'कुंवारे' मुख्यमंत्री के रूप में वे पूरे बंगाल को अपना परिवार मानकर सेवा करेंगे।
शपथ लेते ही एक्शन में सुवेंदु
सरकार बनाने का दावा पेश करते समय ही सुवेंदु ने संकेत दे दिया था कि उनकी सरकार "प्रतिशोध की नहीं, बल्कि परिवर्तन की राजनीति" करेगी। शपथ लेने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) सक्रिय हो गया है। माना जा रहा है कि पहली कैबिनेट बैठक में महिला सुरक्षा टास्क फोर्स और भ्रष्टाचार विरोधी आयोग के गठन पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
