उत्तर प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार रविवार, 10 मई को होने जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह दोपहर 3:30 बजे राजभवन में आयोजित किया जाएगा। इस विस्तार को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई है।
नए मंत्रियों की एंट्री, पुराने दिग्गजों पर गाज
सूत्रों के मुताबिक, इस कैबिनेट विस्तार में न केवल नए चेहरों को मौका दिया जा रहा है, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी की जा सकती है। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री कुछ कड़े फैसले लेने जा रहे हैं। शनिवार शाम को सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की, जिसके बाद इस विस्तार पर अंतिम मुहर लग गई है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर जोर
2027 के विधानसभा चुनावों और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए भाजपा इस विस्तार के जरिए सोशल इंजीनियरिंग का बड़ा दांव खेलने जा रही है। मंत्रिमंडल में पिछड़ों, दलितों और महिलाओं को उचित स्थान देकर पार्टी एक बड़ा संदेश देने की कोशिश में है। वर्तमान में योगी मंत्रिमंडल में 54 मंत्री शामिल हैं, जबकि अधिकतम सीमा 60 मंत्रियों की है। रिक्त पड़े 6 पदों को भरने के साथ ही कुछ मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
लखनऊ में हलचल तेज, मंत्रियों को बुलावा
रविवार दोपहर 3:00 बजे तक सभी मंत्रियों और संभावित विधायकों को लोक भवन पहुंचने का निर्देश दिया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं और वे भी पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। शनिवार रात दिल्ली के आलाकमान और लखनऊ के पदाधिकारियों के बीच अंतिम दौर की बैठक होनी है, जिसमें नामों की सूची को अंतिम स्वरूप दिया जाएगा।
क्या है इस विस्तार का संदेश?
यह कैबिनेट विस्तार केवल खाली पदों को भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक बड़ा 'रीसेट' माना जा रहा है। खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को हटाकर संगठन में नई ऊर्जा भरने की तैयारी है। अब देखना यह होगा कि कल दोपहर जब राजभवन में नए मंत्री शपथ लेंगे, तो किन चेहरों पर सीएम योगी अपना भरोसा जताते हैं और किन दिग्गजों का पत्ता कटता है।
