पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के साथ 'ऐतिहासिक' संघर्ष विराम की घोषणा की है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह (Hezbollah) के ठिकानों पर अब तक का सबसे भीषण हमला कर इस पूरी डील पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
ट्रंप की डेडलाइन और पाकिस्तान का रोल
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी और डेडलाइन के बाद, पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान सीजफायर पर सहमति बनी। ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के युद्धविराम के लिए तैयार हैं। इस शांति वार्ता का अगला चरण इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में होने वाला है, जिसकी अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) करेंगे। लेबनान में मौत का तांडव: क्या धोखा हुआ?
सीजफायर की खबरों के बीच लेबनान से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। बुधवार को इजरायली हमलों में कम से कम 182 लोग मारे गए, जिसे इस युद्ध का सबसे घातक दिन माना जा रहा है। विवाद की जड़:
ईरान का दावा: ईरान और पाकिस्तान का मानना है कि यह सीजफायर पूरे क्षेत्र (Region) के लिए है, जिसमें लेबनान और हिजबुल्लाह भी शामिल हैं। इजरायल का स्टैंड: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान इस डील का हिस्सा नहीं है। इजरायल का कहना है कि जब तक हिजबुल्लाह का खतरा खत्म नहीं होता, हमले जारी रहेंगे।
ट्रंप की सफाई: डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि लेबनान में इजरायली कार्रवाई एक 'अलग संघर्ष' है और वह इससे असहमत नहीं हैं। Strait of Hormuz:
तेल की सप्लाई पर संकट
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से बंद करने की धमकी दी है। अगर यह व्यापारिक मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
