अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर मंगलवार की डेडलाइन तक समझौता नहीं हुआ, तो ईरान को 'स्टोन एज' (पाषाण युग) में वापस भेज दिया जाएगा। वहीं, ईरान ने अमेरिका के अस्थायी युद्धविराम के प्रस्ताव को ठुकरा कर अपनी शर्तें रख दी हैं। ट्रंप की फाइनल डेडलाइन: मंगलवार रात 8 बजे होगा फैसला? 7 अप्रैल 2026 को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद आक्रामक तेवर में नजर आए। उन्होंने ईरान के लिए एक सख्त डेडलाइन तय की है जोकि मंगलवार, वॉशिंगटन समय अनुसार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे)।
मुख्य मांग: ईरान को तुरंत होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) खोलना होगा, जहाँ से दुनिया के 20% तेल की सप्लाई होती है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा, "पूरे देश को एक ही रात में खत्म किया जा सकता है और वह रात शायद कल की रात (मंगलवार) ही हो।" उन्होंने चेतावनी दी कि हमले के बाद ईरान के पास न कोई पुल बचेगा और न ही कोई पावर प्लांट। ईरान का पलटवार: "अस्थायी युद्धविराम मंजूर नहीं" ट्रंप की इस विनाशकारी धमकी के बावजूद ईरान झुकने को तैयार नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने अमेरिका के अस्थायी युद्धविराम (Temporary Ceasefire) के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।
ईरान की 3 मुख्य शर्तें:
ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए। संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म किया जाए (न कि केवल कुछ दिनों के लिए)। हमलों में तबाह हुए नागरिक ढांचे के पुनर्निर्माण में सहयोग दिया जाए।
नेटो और सहयोगियों पर बरसे ट्रंप
इस संकट के बीच ट्रंप ने अमेरिका के पुराने सहयोगियों—ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और नेटो (NATO) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में अमेरिका का साथ न देना नेटो पर एक ऐसा दाग है जो कभी नहीं मिटेगा। ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया कि "अमेरिका को अब ब्रिटेन की जरूरत नहीं है।" क्या यह 'युद्ध अपराध' है?
कानूनी विशेषज्ञों ने ट्रंप की इस रणनीति पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी देश के पावर प्लांट और नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर तबाह करना 'युद्ध अपराध' (War Crimes) की श्रेणी में आता है। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह इन चेतावनियों से "चिंतित नहीं" हैं। जमीनी हकीकत: 13,000 से ज्यादा हमले अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक अमेरिकी सेना ईरान पर 13,000 से अधिक हमले कर चुकी है। ईरान में संचार व्यवस्था लगभग ठप है, जिससे कूटनीतिक संदेशों के आदान-प्रदान में भारी देरी हो रही है। फिलहाल पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र बीच-बचाव की कोशिशों में जुटे हैं।
