बिहार की सियासत में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। तीन दशकों से लालू यादव और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमने वाली बिहार की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है। सम्राट चौधरी को एनडीए (NDA) विधायक दल का नेता चुन लिया गया है, जिसके बाद अब यह साफ़ हो गया है कि वह बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
टूट गया दशकों पुराना रिकॉर्ड
बिहार अब तक इकलौता ऐसा हिंदी भाषी राज्य था जहाँ भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुँच पाया था। गठबंधन की राजनीति में बीजेपी हमेशा छोटे भाई या सहयोगी की भूमिका में रही। लेकिन सम्राट चौधरी के चयन के साथ ही बीजेपी ने बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री देने का गौरव प्राप्त कर लिया है।
शपथ ग्रहण का समय और तैयारी
बीजेपी नेता के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह बुधवार सुबह 10:30 बजे आयोजित किया जाएगा। सम्राट चौधरी ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। वे उन गिने-चुने बीजेपी नेताओं में से हैं जो आरएसएस पृष्ठभूमि से नहीं आते, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक विरासत लेकर आए हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी कुशवाहा समाज के दिग्गज नेता और समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 1990 में राजनीति में प्रवेश किया। 1995 में एक राजनीतिक मामले में 89 दिनों तक जेल में रहे। 2000 में आरजेडी के टिकट पर पहली बार विधायक बने। 2014 में नीतीश कुमार का साथ छोड़ जीतनराम मांझी का समर्थन किया और जेडीयू में शामिल हुए। 2017 में बीजेपी का दामन थामा। मार्च 2023 में प्रदेश अध्यक्ष बने और फिर उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने सिखाया है कि सरकार कैसे चलाई जाती है। पीएम मोदी के 'विकसित भारत' और नीतीश जी के 'समृद्ध बिहार' के सपने को हम सब मिलकर पूरा करेंगे। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नीतीश कुमार के दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने के फैसले की वजह से यह परिस्थिति बनी है और उन्होंने सम्राट चौधरी को अपना आशीर्वाद दिया है।
