पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर दौरे के दौरान हमला होने की खबर सामने आई। अभिषेक बनर्जी चुनाव के बाद हुई हिंसा में प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे, तभी स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। घटना के दौरान उनके काफिले को घेर लिया गया और कथित तौर पर अंडे, पत्थर तथा अन्य वस्तुएं फेंकी गईं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर इलाके में एक मृत TMC कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रहे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सुरक्षा कर्मियों को उन्हें भीड़ से निकालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा। कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं जिनमें अफरा-तफरी और नारेबाजी देखी जा सकती है।
घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह हमला सुनियोजित था और उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि उन पर ईंट और पत्थर फेंके गए तथा हमला राजनीतिक साजिश का हिस्सा हो सकता है। अभिषेक ने कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं और प्रभावित परिवारों से मिलने का अपना कार्यक्रम जारी रखेंगे।
TMC नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसके लिए राजनीतिक विरोधियों को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का कहना है कि राज्य में चुनाव के बाद पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल के बीच विपक्ष माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
जानकारी के अनुसार अभिषेक बनर्जी करीब 26 दिनों बाद किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए थे। उनका यह दौरा चुनाव बाद हिंसा में मारे गए या प्रभावित पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात के लिए आयोजित किया गया था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में वे राज्य के अन्य हिंसा प्रभावित इलाकों का भी दौरा कर सकते हैं।
इस घटना के बाद सोनारपुर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े वीडियो फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में जारी राजनीतिक तनाव के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल राज्य की राजनीति में इस घटना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
