तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए गुरुवार, 23 अप्रैल को हुए मतदान ने इतिहास रच दिया है। चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 85% से अधिक का अभूतपूर्व मतदान दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है, जो जनता के जबरदस्त उत्साह और राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।
चेन्नई से कन्याकुमारी तक लंबी कतारें
सुबह 7 बजे मतदान शुरू होते ही मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें देखी गईं। युवा मतदाताओं से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं ने भारी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कई मतदान केंद्रों पर मतदान का समय खत्म होने के बाद भी लोग कतारों में खड़े नजर आए, जिसके कारण मतदान प्रक्रिया देर शाम तक जारी रही। राज्य के ग्रामीण इलाकों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा अधिक मतदान देखने को मिला।
दिग्गजों ने डाला वोट, कड़े मुकाबले के आसार
इस एक चरण के चुनाव में राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर वोट डाले गए। मुख्यमंत्री और द्रमुक (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन, अन्नाद्रमुक (AIADMK) के पलानीसामी, ओ. पनीरसेल्वम, और पीएमके (PMK), भाजपा (BJP) सहित अन्य प्रमुख दलों के नेताओं ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वोट डाला। चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान मोटे तौर पर शांतिपूर्ण रहा।
इस बंपर वोटिंग के क्या हैं मायने
रिकॉर्ड 85% मतदान ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। आमतौर पर भारी मतदान को सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का संकेत माना जाता है, जिससे विपक्ष को फायदा मिल सकता है। हालांकि, सत्तारूढ़ द्रमुक का दावा है कि यह उनकी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और सुशासन के पक्ष में जनादेश है। दूसरी ओर, अन्नाद्रमुक और भाजपा गठबंधन को उम्मीद है कि मौन मतदाता (Silent Voters) बदलाव के लिए बाहर निकले हैं।
इस बंपर वोटिंग ने तमिलनाडु के मुकाबले को बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय बना दिया है। अब सभी की निगाहें 2 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि द्रविड़ राजनीति के इस गढ़ में जनता ने किसे सत्ता की चाबी सौंपी है।
