देश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 27 सीटों और बिहार व कर्नाटक विधान परिषद चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद राजनीतिक दलों ने उम्मीदवारों के चयन और रणनीति पर काम तेज कर दिया है। आगामी चुनावों को संसद और राज्यों के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव आयोग के अनुसार राज्यसभा की 27 सीटों के लिए 18 जून को मतदान कराया जाएगा। इनमें 24 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव होंगे, जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा की एक-एक सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। इसके साथ ही बिहार और कर्नाटक की विधान परिषद सीटों के लिए भी चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीदवार 8 जून तक अपने नामांकन पत्र जमा कर सकेंगे। इसके बाद 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 11 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 18 जून को होगा और उसी दिन शाम को मतगणना भी पूरी कर ली जाएगी।
बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव भी इस बार काफी अहम माने जा रहे हैं। बिहार में 10 सीटों और कर्नाटक में 9 सीटों पर चुनाव होने हैं। राजनीतिक दल इन चुनावों को अपने संगठनात्मक और विधायी प्रभाव को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं। कर्नाटक में सत्तारूढ़ दल के लिए परिषद में बहुमत मजबूत करने का मौका माना जा रहा है, जबकि बिहार में विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है।
राज्यसभा चुनावों पर पूरे देश की नजर बनी हुई है क्योंकि इनका असर संसद के ऊपरी सदन में राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है। भाजपा और विपक्षी दल दोनों ही अपने प्रभावशाली नेताओं को राज्यसभा भेजने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। कई राज्यों में उम्मीदवारों के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है और अगले कुछ दिनों में कई बड़े राजनीतिक फैसले सामने आ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये चुनाव केवल रिक्त सीटों को भरने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी संकेत देने वाले साबित हो सकते हैं। राज्यसभा में संख्या बल बढ़ाने के लिए सभी प्रमुख दल पूरी ताकत झोंकते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवारों के चयन से लेकर मतदान तक हर चरण पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी।
अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और संभावित उम्मीदवारों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में कई राज्यों से बड़े नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गर्म होने की संभावना है।
